होली का त्योहार

हर्ष का उपहार ले वसंत की वो भोर हो
या तो जेठ मास में सूर्य वो कठोर हो
काननो मे घूमता हो कुंजर समूह कोई
लोहित गगन में या तो खग कुलों का शोर हो

जो समझ सके की एक देह के ये अंग हैं
तो कहोगे ज़िंदगी मे धूप छाँव  संग हैं
हार की है रात तो जीत भोर लाएगी
हो कैसे भी पर सभी ये ज़िंदगी के रंग हैं

तो हमारी ज़िंदगी का बस यही एक सार है
हर कठिन रास्ते से भागना ही हार है
हर्ष और विषाद के जो रंग साथ घोल लो
तो हरेक दिन तुम्हारा होली का त्योहार है
तो हरेक दिन तुम्हारा होली का त्योहार है


तारीख: 18.06.2017                                                        कुणाल






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है


नीचे पढ़िए इस केटेगरी की और रचनायें