मैने देखा था एक बूढ़े बाप को

मैने देखा था एक बूढ़े बाप को।
अनकहे और सुलझे हुऐ ख्वाब को।
जिनकी आँखों में थी उम्मीदें भरी।
और बातें थी सोने के जैसे खरी।
मैंने पूछा दादा क्यों कडे हो गये।
लेकर आँखों में आंसू वो बोले मुझे।
बेटे मेरे सभी अब बडे हो गये।
एक डॉक्टर तो एक इंजिनियर हो गया।
मुझको लगता था जीवन मेरा ये सफल हो गया।
सच कर दिखाया उन्होंने मेरे ख्वाब को।
मैने देखा था एक बूढ़े बाप को।

मैने पूछा उनसे अब क्यों हो दुखी।
सच हो गये तुम्हारे सपने सभी।
चलते चलते वो रुक कर बोले मुझे।
बेटा अब क्या बताओं में तो तुझे।
मैं छोटा रह गया वो बड़े हो गये।
मेरे बेटे ना जाने कहा खो गये।
बोले मुझसे माँ उनकी ये सह ना सकी।
अपने बेटों के बिन वो रह न सकी।
आंखे सारी उनकी व्यथा कह गयी।
वो बूढी जवां अब चुप रह गयी।
मैने देखा था टूटे हुए ख्वाब को।
मैने देखा था एक बूढ़े बाप को।

जल जल के खेतों पढ़ाया उन्हें।
बैठो बातें सारी बताऊ तुम्हे।
कुर्ता मेरा तो कल भी फटा ही ये था।
पर ड्रेसें सिलाकर दी थी उन्हें।
अपने पैरो जब वो खड़े हो गये।
मेरे बेटे थे जो अब बड़े हो गये।
आंखे झलकी उनकी वो रो पड़े।
रोक ना पाया मैं भी अपने आप को।
मैने देखा था एक बूढ़े बाप को।
                   


तारीख: 30.06.2017                                                        प्रशांत पाठक






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