मेरे दर्द सिर्फ़ मेरे हैं

मेरे दर्द सिर्फ़ मेरे हैं
इनपे किसी का अधिकार नहीं
कोई छुए मुझे मेरे ज़ख़्मों पे
ये मुझे स्वीकार नहीं

वो सैनिक जो सरहद पे खड़ा है
तुम्हारे लिए दिन रात लड़ा है
तुम रहो महफ़ूज़ घर में
वो ढूँढे शत्रु अचर में
छोड़ो तुम शौर्यगान करो
तुम्हारा उसपे कोई उपकार नहीं
मेरे दर्द सिर्फ़ मेरे हैं
इनपे किसी का अधिकार नहीं

वो बच्चा जो गाता है रेल में
क्या मन उसका ना लगता खेल में
क्यू अपना बचपन है खोता
क्यू ना माँ की गोद में सोता
छोड़ो ये भूखे पेट का सवाल है
समझाने का कोई सार नहीं
मेरे दर्द सिर्फ़ मेरे हैं
इनपे किसी का अधिकार नहीं

रात के आकाश में तारे बहुत है
तुम क्यों उसका अँधेरा देखो
जलता है सूरज तो जलने दो
तुम नित नया सवेरा देखो
उसकी तपिश से तुम्हें कोई सरोकार नहीं
मेरे दर्द सिर्फ़ मेरे हैं
इनपे किसी का अधिकार नहीं
कोई छुए मुझे मेरे ज़ख़्मों पे
ये मुझे स्वीकार नहीं
मेरे दर्द सिर्फ़ मेरे हैं
इनपे किसी का अधिकार नहीं


तारीख: 30.06.2017                                                        राहुल तिवारी






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