आए सब

चौके सब, बुझे कुछ, पर समझा कोई नहीं ।

निकले सब, भागे कुछ, पर पहुंचा कोई नहीं ।

उपर सब, बाहर कुछ, पर भीतर कोई नहीं ।

मांगे सब, छीने कुछ, पर पाए कोई नहीं ।

रुके सब, छुपे कुछ, पर बचा कोई नहीं ।

चहके सब, चीखे कुछ, पर बोला कोई नहीं ।

हिले सब, जागे कुछ, उठा कोई नहीं ।

बिछड़े सब, याद कुछ, छूटा कोई नहीं ।

याद सब, पास कुछ, साथ कोई नहीं ।

आए सब, रुके कुछ, रहा कोई नहीं ।

 


तारीख: 30.06.2021                                                        गौरव






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है