एक चिठ्ठी ससुरजी के नाम

 

 

"हैप्पी फादर्स डे पापाजी ..."

कहाँ से शुरू करूँ, समझ नहीं आ रहा.  पापाजी आपने मेरी ज़िंदगी  की बहुत बड़ी कमी को पूरा कर दिया. मुझे आज भी वो दिन याद है, जब आप रजत के साथ पहली बार मुझे देखने आये थे. मैं कितनी सकुचाई सी-घबराई सी थी, आपने कुछ भी नहीं पूछा, सिर्फ मेरे सर पर हाथ रखा और कहा - "मेरी बेटी बनोगी.. " मैं भीगी आँखों से, आपके पैरों में झुक गई, तो आप आर्शीवाद देते हुए बोले - "बेटियां पाँव नहीं छूती गले लगती है..." तब से, अपने दिल से, मैंने आपको पिता का स्थान दे दिया और अपने भी पिता की कमी को पूरा करके खूब प्यार दिया.

घर में सिर्फ हम तीन सदस्य थे, आप, मैं और रजत क्योंकि हमारी शादी के लगभग एक साल पहले ही सासू माँ का देहांत हो चूका था. आपने भी माँ और पिता की दोहरी भूमिका निभाई. आपने घर के हर काम में मेरा साथ दिया और अभी तक दे रहे है.

जब भी मैं बीमार होती या कुछ टेंशन होती तो एक छोटी सी बच्ची बनकर आपके कंधे पर सर टिका देती और कुछ ही देर में सब  सही हो जाता.

रजत भी आपकी तरह ईमानदार और कर्मठ है. उन्हें भी आपकी तरह दिखावा नहीं पसंद. उनमें भी तो आपके ही संस्कार है.

और तो और मेरी माँ के जाने के बाद, अपने पोते राहुल के होने पर भी, आपने, माँ की कमी महसूस नहीं होने दी. आपने मेरा बहुत ख्याल रखा.

राहुल का भी आप बहुत ध्यान रखते है. उसे भी पढ़ाई के साथ साथ जीवन की बहुत अच्छी बातें समझते है.. आपके स्नेह की छाया में राहुल फूल के समान महक रहा है.

आपने पिता के रूप में लाड दुलार किया, गुरु की तरह सही राह दिखाई और एक दोस्त की भाँती हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया.

आपका आशीर्वाद इस तपती धूप में ठंडक का एहसास करता है.

मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ की पिता के रूप में मेने आपको पाया.

पापा अपने मुझे इतना दिया है, दिल की गहराईयों से आपका शुक्रिया...


तारीख: 03.07.2020                                                        मंजरी शर्मा






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है