
मैं इस देश की आभारी हूँ
इस पावन मिट्टी में जन्म लिया है ,
यह मातृभूमि मेरी पहचान है ।
इसमे खेलकर हर पल जिया है,
यह हर भारतीय की शान है।
मैं इस देश की आभारी हूँ ।
इस देश की हवा में साँसे ली हैं ,
मेरी हर सांस इसकी ऋणी है ।
यहाँ की पावन नदियों का जल पिया है ,
मेरे रक्त की हर बूंद इसे समर्पित है ।
मैं इस देश की आभारी हूँ ।
रामायण और गीता सुनकर बड़े हुए हैं ,
यही हमारी संस्कृति का आधार है ।
सत्य , धर्म , करुणा और त्याग ,
भारत की सबसे बड़ी पहचान है।
मैं इस देश की आभारी हूँ
हिमालय जिसके सर का ताज है ,
सागर जिसके चरण पखारता है ।
प्रकृति की गोद में तो , पूरे जग में ,
मेरा देश ही सबसे सुंदर लगता है ।
मैं इस देश की आभारी हूँ
नमन करती हूँ आज उन वीरों को ,
जिन्होंने देश के लिए दे दी अपनी जान ।
तिरंगे की हर लहराती शान पर ,
मेरा जीवन भी है कुर्बान।
मैं इस देश की आभारी हूँ ।
आओ मिलकर आज लेते हैं ये प्रण ,
मेहनत ईमान और प्रेम से ।
देश को ऊंचाइयों पर ले जाएंगे ।
पूरी दुनिया में अपने देश को बुलंदी पर पहुचाएंगे ।
मैं इस देश की आभारी हूँ । मैं इस देश की आभारी हूँ।
जय हिन्द !
07-अगस्त -2026 श्वेता रस्तोगी