सावन

सावन कहां कभी खाली हाथ आता है।

कई रंगों को अपने साथ लाता है।

सावन कहां कभी.......

कावड़ियों की टोली और बम भोले की बोली साथ लाता है।

सावन कहां कभी........

चारों ओर हरियाली और मोर की चाल मतवाली साथ लाता है ।

सावन कहां कभी..........

नदियों में रवानी और बाढ़ की कहानी साथ लाता है।

सावन कहां कभी..........

बच्चों की मस्तियां और कागज की कश्तियां साथ लाता है ।

सावन कहां कभी.......

हाथों में छतरियां और भीगी हुई गठरियां साथ लाता है ।

सावन कहां कभी.......

भाई बहनों का प्यार और रक्षाबंधन का त्योहार साथ लाता है।

सावन कहां कभी.......

चाय संग पकौड़े और रिश्ते बहुतेरे साथ लाता है ।

सावन कहां कभी.......

यादों की हिचकियां और दर्द भरी सिसकियां साथ लाता है।

सावन कहां कभी  ....... ✍️ निधि खत्री

 


तारीख: 19.08.2026                                    निधी खत्री




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