
वक्त कितना बदल गया है ,
ऐसा लगता है , सबकुछ खो सा गया है।
आज भी हैं , दिन में 24 घंटे हैं ,
घूमती है धरा, उसी धुरी पर
फिर अब कहाँ चला गया हैं वक्त ,
न संवाद है , न वाद है , न विवाद है ।
वक्त कितना बदल गया है ,
ऐसा लगता है सबकुछ खो सा गया है।
स्वयं को मोबाइल में, है दिया डूबा
अब whatsapp पर ही होते पति – पत्नी के सब संवाद
बच्चे मोबाइल पर ही कह देते हैं सब बात
साथ में बैठे हो जाते हैं कईं दिन -रात ।
वक्त कितना बदल गया है ,
ऐसा लगता है सबकुछ खो सा गया है।
पहले टीवी देखना भी एक उत्सव सा था
जब पूरा परिवार देखता था रामायण साथ
बीच-बीच में मम्मी पापा देते थे ज्ञान
एक जुट मिलजुलकर रहने पर था मान ।
वक्त कितना बदल गया है ,
ऐसा लगता है सबकुछ खो सा गया है।
आजकल अपनी मेमोरी कम है , फोन की मेमोरी है ज्यादा
कृत्रिम बुद्धि पर है भरोसा , खुद की बुद्धि से ज्यादा
जहां बचपन से जाते हैं , वहाँ भी आज रास्ता GPS से पूंछते हैं
आज हर प्रश्न का उत्तर ChatGPT से करते हैं ।
सच में वक्त कितना बदल गया है ,
ऐसा लगता है सबकुछ खो सा गया है।