उगता सूरज

उगता सूरज 🌤️कहता है, 

मुझको तुम स्वीकार करो।

चलो साथ में मेरे तुम,

और मुझसा व्यवहार करो।

🌤️उगता हूं नित्य सुबह वही।

 

और 🌥️ढलता हूं नित्य शाम वही।

मैं दाता हूं फिर भी मुझको ,

विलम्ब (देरी )बिल्कुल स्वीकार नहीं।

मेरे पुंज को 💥फिर भी हर कोई,

अपनी सुविधा से लेता है।

पर नियम यही कहता है,

लेने वाला समय संग रहता है।     गई✍️ निधि खत्री


तारीख: 06.08.2026                                    निधी खत्री




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