
ईश्वर ने सृष्टि की रचना भी कैसे की है,
एक नर और एक नारी ,
इनसे ही है ये दुनिया सारी।
हिंदी भाषा के रचनाकार ने ,
हर नाज़ुक चीज को स्त्रीलिंग बताया है,
और हर मजबूत चीज को पुल्लिंग।
विशाल फैला आस्मान पुल्लिंग है,
नीचे फैली धरती जो सबको अपनी गोद में समेटे है स्त्रीलिंग ।
सूरज का तेज़ प्रकाश पुल्लिंग है,
पर चाँद की शीतलता स्त्रीलिंग ।
पानी से भरे बादल पुल्लिंग हैं।
पर धरती पर गिरी बरखा का पानी स्त्रीलिंग।
स्थिर ,अडिग खड़ा गिरिराज पुल्लिंग है,
पर हिमालय से बहती नदियां स्त्रीलिंग।
उन्नत मस्तक पुल्लिंग है, पर आँखें स्त्रीलिंग।
पुष्प पुल्लिंग है , पर उसकी खुशबू स्त्रीलिंग।
फल पुल्लिंग है पर उनकी मिठास स्त्रीलिंग।
दोनों का अपना स्थान है , अपना अस्तित्व है,
उनकी अपनी सुंदरता अपनी जगह पर ही है।
स्त्री पुरुष का स्थान नहीं ले सकती और ,
पुरुष स्त्री का स्थान नहीं ले सकता ।
बस एक दूसरे का सम्मान करते हुए ,
तथा अपना कर्तव्य निभाते हुए आगे ,
साथ – साथ आगे बढ़ सकते हैं।