राम की राम कहानी

देखते ही सिया को उपवन में,  

राम का मन हर्षाया।  

उनको पाने की “इच्छा”से,  

स्वयंवर में धनुष उठाया।  

सिया रूप का वर्णन सुनकर,  

“क्रोध” बना अनुरागी,  

रावण की मनसा तृष्णा बनकर,  

सिया हरण की जागी।  

पर राम “क्रोध”, “लोभ” से कोसों दूर थे,  

राज-पाठ सब त्यागा,  

माता-पिता के वचन की खातिर,  

तोड़ा “मोह” का धागा।  

“अभिमानी” रावण को मारा; राम ने -

पर राम नहीं बने अभिमानी,  

कैकई-मंथरा की “ईर्ष्या”, भी,  

हो गई पानी-पानी।  

तभी तो राम भगवान कहलाए,  

और ज्ञानी रावण भी अभिमानी,  

छः विकारों से दूर थे राम,  

यही है “राम” की राम कहानी। निधि खत्री ✍️


तारीख: 06.07.2026                                    निधी खत्री




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