
जिसने कही- अनकही हर बात है मानी ।
जिसके सम्बोधन में तो न है,
फिर भी न नहीं करती है ,
कर लो कितनी भी शैतानी।।
वह कोई नहीं मां की जननी है।
मां के बच्चों की प्यारी नानी।
गर्मी की छुट्टियों में ,
जो करती है इन्तजार।
साल भर का प्यार चंद दिनों में कर देती है निसार।
बूढ़ी आंखों में दिखती है ,
मुस्कुराती हुई जवानी।
वह कोई नहीं मां की जननी है।
मां के बच्चों की प्यारी नानी।
पहले करती थी बच्चों की चिंता।
अब बच्चों के बच्चों की चिंता।
ढूंढती है नाती - नातिन में ,
अपनी ढलती जवानी।
हर घर में होती है नानी की यही कहानी।
वह कोई नहीं मां की जननी है।
मां के बच्चों की प्यारी नानी।